Shastri Dheeraj Pandey 12.04.2021
“पुष्कर” नवांश विचार-
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प्रत्येक राशि के कुल ९ नवांश होते हैं।शुक्र, गुरु, चंद्र व बुद्ध के नवांश को ही “पुष्कर नवांश” कहा गया है।प्रत्येक राशि के “२” पुष्कर नवांश होते हैं अतः कुल “२४” पुष्कर नवांश हैं जिनमें से ९ का स्वामी “गुरु”, ९ का स्वामी “शुक्र” ३ का स्वामी “चंद्र” और ३ का स्वामी “बुद्ध” है।
मेष, सिंह, धनु राशि का “सातवाँ” और “नौवाँ” नवांश क्रमशः “शुक्र” व “गुरु” की राशि “तुला” व “धनु” का है जोकि पुष्कर नवांश कहे गये हैं।
वृष, कन्या, मकर राशि का “तीसरा” व “पाँचवा” नवांश क्रमशः “गुरु” व “शुक्र” की राशि “मीन” व “वृष” का है जोकि पुष्कर नवांश कहे गये हैं।
मिथुन, तुला, कुम्भ राशि का “छठा” व “आठवाँ” नवांश क्रमशः “गुरु” व “शुक्र” की राशि “मीन” व “वृष” का है जोकि पुष्कर नवांश कहे गये हैं।
कर्क, वृश्चिक, मीन राशि का “पहला” व “तीसरा” नवांश “चंद्र” व “बुद्ध” की राशि “कर्क” व “कन्या” का है जोकि पुष्कर नवांश कहे गये हैं।
उपरोक्त २४ नवंशों में से मात्र ३ नवांश “वर्गोत्तम” होते हैं।अर्थात शुभता में और भी शुभता।
वृष राशि में “पाँचवा”,
कर्क राशि में “पहला”,
धनु राशि में “नौवाँ”।
पुष्कर नवांश में स्थित शुभ ग्रह अपनी दशा-अंतर्दशा में अपने कारकतत्वों के अनुरूप शुभ फलों में “वृद्धि” करता है तथा अशुभ/पाप ग्रह अपनी दशा-अंतर्दशा में अपने कारकतत्वों के अनुरूप अशुभ/पाप फलों में “कमी” करता है।अर्थात शुभ ग्रह उससे अधिक शुभ फल दे सकता है जो वह लग्न कुंडली में दर्शाता है और अशुभ/पाप ग्रह उतना अशुभ नहीं कर पाता जितना कि वह लग्न कुंडली में दर्शाता है।
अतः सरल शब्दों में हम कह सकते हैं कि पुष्कर नवांश में स्थित कोई भी ग्रह शुभता में “वृद्धि” व अशुभता में ”न्यूनता” को दर्शाता है।
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